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ब्लैकमेलिंग – नो मोर

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Saima, Star Live 24
Saturday, June 14, 2014
पर प्रकाशित: 19:21:28 PM
टिप्पणी
ब्लैकमेलिंग – नो मोर

…सर्वमंगला मिश्रा

भारत की सरकार जब भी अपने दम पर खड़ी ना होकर दूसरों के सहारे खड़ी हुई तो असहाय की स्थिति में ही रही। चाहे वो वी पी सिंह की सरकार रही हो, या चन्द्रशेखर की, यूपीए 1 रही हो, या यूपीए 2, अटल बिहारी की सरकार 1996 में 13 सहयोगियों वाली या 1999 की सरकार। हर बार सरकार को अपने फैसलों में सहयोगी पार्टियों की हामी भरवानी जरुरी होती है और जब सहयोगी इंकार करते हैं तो ब्लैकमेलिंग की शिकार सरकार बनती है। खामियाज़ा जनता भुगतती है। पर इस बार भाजपा पार्टी ने इस कश्मकश से मुक्ति पा ली है और इसे पाने में इस बार जनता ने अहम भूमिका निभाई है। 

गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने 272 प्लस के मिशन को नया इंजन लगाया और चुनाव के मध्य से ही 300 कमल मांगने लगे थे। कहते हैं कि ईश्वर जब देता है तो छप्पर फाड़ कर देता है। वही हुआ 336 कमल पूरे देश की जनता ने मिलकर मोदी की झोली में भर दिया। जिससे मोदी फूले न समाये। संसद में अपने कदम अंगद की तरह रखने के लिए 272 का जादुयी आंकड़ा मिलना अनिवार्य होता है। जादूगर मोदी ने अपना कमाल पूरे देश में तो दिखाया ही साथ ही विश्वस्तरीय ख्याति पाने में भी मोदी का जवाब नहीं। मोदी ने गुजरात विधानसभा को धन्यवाद कर अपनी मां का आशीर्वाद लिया  और गुजरात को अलविदा कहकर दिल्ली में लम्बी पारी खेलने के ध्येय से नमन किया। श्रद्धा से सिर सेंट्रल हाल में झुक गया, आंखों में नमी आ गयी क्योंकि उस दिन सपना पूरा होने की एक और सफल सीढी मोदी ने चढी थी। पर 26 मई 2014 इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया जब कांग्रेस से अलावा किसी दूसरी पार्टी ने अपने दम खम पर पार्टी का नया ढांचा गढ दिया। दिन भर के व्यस्त कार्यकाल के बाद जैसे ही घड़ी में शाम 5 बजा राष्ट्रपति भवन का प्रांगण वरिष्ठ एवं आमंत्रित सदस्यों का अंबार लगने लगा। अमूमन गोधूलि बेला में मोदी ने कहा- “मैं नरेंद्र दामोदर दास मोदी” सूर्य जब घर की ओर रवाना हो रहा था तो देश को एक नया सूरज मिला नरेंद्र भाई के तौर पर। जिसने भारत को भा-र-त बनाने का सपना दिखाया है। देश जिसे सिर्फ और सिर्फ नरेंद्र मोदी पर विश्वास है। जिसे मंत्रीमंडल के सदस्यों से ज्यादा मोदी पर भरोसा है। क्योंकि इसी नरेंद्र मोदी ने अंधेरे की गर्त में जा चुके गुजरात को गु-ज-रा-त बनाया। देश के समक्ष गुजराती माडल पेश कर डाला। जो कहीं खड़ा न था राजनीति के धरातल पर। उस गुजरात को शीर्षस्थ आसन पर पदासीन करा डाला। उसी नज़र की तर्ज पर अब देशवासियों को भरोसा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि भारत अब एकबार फिर सोने की चिड़िया कहलाएगा और हर घर में दीप जलेगा। बेरोजगार अब विदेश की ओर नहीं झांकेंगा। कोई किसान अब कर्ज से दबकर आत्महत्या नहीं करेगा। फिर कभी निर्भया कांड न होगा। क्योंकि देश का नारा था “अबकी बार मोदी सरकार”, तो मोदी का नारा था-“सौगंध मुझे इस धरती की, ये देश नहीं मिटने दूंगा”। 

मोदी एक ऐसा नाम है जो जाना जाता है अपने तरीके से चलने के लिए। जो किसी के पदचिन्हों पर कदम नहीं रखता। सबसे छोटा मंत्रीमंडल बनाकर अपने मंत्रियों को ताकीद दी है कि काम ही है जो उन्हें मोदी के आतंक से बचा सकता है। मोदी ने किसी के बूते सरकार नहीं बनायी। यही वो वजह है कि बिना डरे शेर की तरह मोदी अपने काम में लग गये हैं। साज सज्जा से दूर रहने का आदेश भी दे डाला है अपने मंत्रियों को। जिससे देश के कंधों पर मंत्रियों के ऐशो आराम का बोझ न पड़े और देश उन्नति कर सके। कांग्रेस के पक्षधर भी अब मुंह खोलकर मोदी की सरे आम प्रशंसा के पुल बांधने में लग गये हैं। पी एम साहब के सारे प्लान जनता या नेता किसी को सही से पता नहीं, तरकश में तीर कितने और कौन से मोदी जी गुजरात से लेकर आये हैं ये सिर्फ मोदी जी या उनके परम और घनिष्ठ अमित शाहजी ही जानते हैं। कब कौन सा तीर मोदी जी कहां से चलाकर किसपर निशान साधेंगें ये मोदी का तीर भी नहीं जानता। कुछ पक्ष डरे सहमे भी हैं, क्योंकि जब सत्ता परिवर्तन होता है तो अपना पराया और पराया अपना हो जाता है। आज जिस सोनिया गांधी और राहुल को कांग्रेस पार्टी का खेवनहार और एकमात्र चिराग माना जाता था उसी कांग्रेस पार्टी के भंवरलाल जो राजस्थान से अपनी आवाज तेज की तो इनाम भी तुरंत मिल गया। ऐसी आवाजें अभी उठनी बाकी हैं जो परिवारवाद के चंगुल से कांग्रेस को निकालना चाहेंगी। जिसतरह पार्टी में वरिष्ठों को दरकिनार कर राहुल बाबा अपने आफिस से पूरा देश चलाने का सपना देख रहे थे वो तो धवस्त हो चुका है। आज राहुल गांधी के अंदर से अगर कोई आवाज़ आ रही होगी तो वो यही होगी-

जीवन का संघर्ष होता नहीं आसां इतना,

गरीब की रोटी को दिल से सराहा नहीं जितना,

आसमां को मंजिल बनायी थी,

पर हकीकत से रुबरु होने की कहानी अभी बाकी थी।

सपा के मुखिया मुलायम सिंह जी वैसे तो उनका भाषण समझ से परे होता है। पर, इस चुनाव में इतना बोले कि न समझने वाला भी समझ गया कि मुलायम जी बोलते तो हैं भले हुंकार की जगह सिर्फ “हुं"  भर रह गया हो। उधर सुपुत्र जी और मुख्यमंत्री ने भी अपने काम करने के अंदाज़ में परिवर्तन कर मोदी के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने की शंखध्वनि कर दी है। गंगा सफाई में कागजी योगदान भी दिखाये। पर 60 साल में लिखी गयी किताब पर नया कभर नहीं चढेगा बल्कि नयी किताब भारत देश के नाम लिखी जायेगी ऐसा देश का नागरिक चाहता है। मुलायम जी बांप चुके हैं कि उनके बाहरी या भीतरी सपोर्ट की आवश्यकता इस सरकार को नहीं है। अर्थात् ब्लैकमेलिंग अब नो मोर....  

पूर्व में अब भी अपना वर्चस्व बनाये रखने वाली ममता दीदी जिसने मोदी की हवा को बंगाल में घुसने ही नहीं दिया और एकछत्र शासन की हवा बरकरार रखी। पर केन्द्र की सत्ता में घुसपैठ भी मुश्किल लगती है। बात –बात पर दीदी और अम्मा को हर सरकार को मनाना पड़ा और कई बार दुस्साहस का परिणाम भी भुगतना पड़ा। पर अबकी बार मोदी सरकार ने खुले शब्दों में कह दिया है ब्लैकमेलिंग नो मोर। पर मोदी सरकैर ने आह्वाहन भी किया है सबका साथ सबका विकास- पर, इस विकास में पश्चिम बंगाल से सटा बिहार की स्थिति अनमनी होते होते रह गयी। वजह दो साथियों के अहम का मुद्दा। भविष्य इस बात को गवाही के तौर पर इतिहास में यह कहानी भी दर्ज करेगा कि इतने सालों से चल रही मांग तेलंगाना को तो बीजेपी के चुनावी बल से खिसकाने के लिए कांग्रेस पार्टी ने अपनी झोली में डाल लिया था। हांलांकि बाजेपी इसका श्रेय लेने में पीछे नहीं रही। सरकार के गठन के बाद क्या बिहार को मोदी सरकार स्पेशल राज्य का दर्जा आसानी से देगी ? या कहानी कुछ और लिखी जा चुकी है। अपना दांव खेल चुके नीतीश कुमार मोदी के शतरंजी चाल की राह देख रहे हैं। पूरे देश पर एकछत्र राज्य करने का सपना लिए यह सिकन्दर अपने सहस्त्र हाथ कैसे करता है यह अचम्भे से भरा होगा।       



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