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अपने आइडिया भी पेश कर सकेंगी निजी कंपनियां

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Nitika, Star Live 24
Thursday, June 4, 2015
पर प्रकाशित: 15:15:37 PM
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अपने आइडिया भी पेश कर सकेंगी निजी कंपनियां

राजमार्गों के प्राइवेट डिवेलपर्स के बीच प्रतिस्पर्द्धा को बढ़ावा देने के लिए भारत एक नई नीति अपनाएगा। इसके तहत कंपनियों को बिना मांगे ही आइडिया देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। साथ ही, डिटेल्ड प्रॉजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने वाले डिवेलपर को 'फर्स्ट राइट ऑफ रिफ्यूजल' भी दिया जाएगा।

अधिकारियों ने बताया कि मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट ऐंड हाईवेज कुछ प्रॉजेक्ट्स के लिए यह तरीका पहली बार अपनाने के प्रस्ताव को अंतिम रूप दे रही है।

एक सीनियर अधिकारी ने कहा, 'जिस कंपनी ने डीपीआर तैयार की हो, उसे प्रॉजेक्ट की जरूरतों की अच्छी तरह जानकारी होगी और वह किसी दूसरे के मुकाबले प्रॉजेक्ट को जल्द पूरा करने के लिए ज्यादा तैयार भी होगी।'

अधिकारी ने कहा कि मिनिस्ट्री का मानना है कि इससे नए आइडिया सामने आएंगे और देश में राजमार्गों को तैयार करने की रफ्तार बढ़ेगी। हालांकि इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में इस तरीके का इस्तेमाल कुछ दक्षिण अफ्रीकी देशों को छोड़कर दुनिया के ज्यादातर देशों में नहीं होता है।

आंध्र प्रदेश सरकार ने यह तरीका अपनाने का फैसला पहले ही कर लिया है। वह अपनी नई राजधानी के लिए कुछ प्रॉजेक्ट्स में इसी तरीके से कदम बढ़ाएगी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस कदम से प्राइवेट कंपनियों में उत्साह बढ़ेगा और वे बिना मांगे ही अपनी ओर से प्रॉजेक्ट के आइडिया पेश करेंगी।

उदाहरण के लिए, स्पेशल टेक्नॉलजी के इस्तेमाल से पुलों के निर्माण या पहाड़ी इलाकों जैसी मुश्किल भौगोलिक स्थितियों में राजमार्ग बनाने जैसे प्रॉजेक्ट्स में इस सिस्टम से मदद मिल सकती है।

उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में कंपनियों को तकनीक या अपने कामकाज के मामले में प्रॉजेक्ट से जुड़ी कोई विशेष योजना सामने रखनी होगी ताकि डीपीआर बनाने वाली कंपनी दूसरी प्रतिभागी कंपनियों को बिडिंग प्रोसेस में कड़ी टक्कर दे सके।

पीडब्ल्यूसी इंडिया के एसोसिएट डायरेक्टर (इंफ्रास्ट्रक्चर) विकास शारदा ने कहा, 'इससे कॉन्ट्रैक्ट्स देने में तेजी आएगी। ऐसे मामले में बिड्स मंगाने से मार्किट की प्रतिक्रिया का अंदाजा भी हो जाता है और प्राइस वाजिब लेवल पर रहती है।'

हालांकि एक्सपर्ट्स ने आगाह किया है कि पॉलिसी गाइडलाइंस बिल्कुल स्पष्ट होनी चाहिए ताकि डीपीआर बनाने वाली कंपनी पूरे सिस्टम को मैन्युपुलेट न कर सके। इस साल 2.5 लाख करोड़ रुपये के हाईवेज प्रॉजेक्ट्स दिए जाने का टारगेट रखा गया था।

लेकिन फाइनैंस मिनिस्टर अरुण जेटली के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर पर जोर दिए जाने के बाद मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवेज ने टारगेट बदलकर 3.5 लाख करोड़ रुपये कर दिया।

मिनिस्ट्री ने 'सेतु भारतम परियोजना' के तहत रेल ओवरब्रिज और अंडरब्रिज बनाकर सभी नेशनल हाईवेज पर लेवल क्रॉसिंग्स को हटाने का निर्णय भी किया है। इसने करीब 1,500 पुराने पुलों को चिन्हित किया है और इनके लिए वह कंसल्टेंट्स नियुक्त करने की तैयारी में है।सौ.नवभारत टाईम्स



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