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पर्यावरण हितैशी कॉयर से घर बनेंगे साउंड प्रूफ

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Vijay Kumar, Star Live 24
Saturday, November 30, 2013
पर प्रकाशित: 14:19:00 PM
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पर्यावरण हितैशी कॉयर से घर बनेंगे साउंड प्रूफ

नई दिल्ली ।। घरों में पायदानों, कालीनों और रस्सियों के रूप में कॉयर यानी नारियल की जटाओं का इस्तेमाल लम्बे समय से होता रहा है, लेकिन अब घरों में इनका इस्तेमाल एक नये रूप में-ध्वनि अवरोध के रूप में हो रहा है। घरों की दीवारों की सजावट में चार चांद लगाते हुए ये कॉयर ध्वनि को रोकने का भी काम करते हैं। अलाप्पुझा में एक से छह फरवरी के बीच होने वाली कॉयर कांग्रेस में कॉयर के अभिनव अनुप्रयोगों तथा इस उद्योग में हुए अन्य नए घटनाक्रमों पर विस्तार से चर्चा होगी। यह कांग्रेस कॉयर एवं प्राकृतिक फाइबर उत्पादों पर दुनिया का सबसे बड़ा आयोजन है।

केरल के राजस्व और कॉयर मंत्री अदूर प्रकाश, जो हाल में ही राष्ट्रीय राजधानी आए थे, ने कहा, ‘केरल निर्मित कॉयर के स्वदेशी एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजार के विस्तार के मुख्य लक्ष्य को लेकर आयोजित हुए तीसरी कॉयर कांग्रेस में करीब 60 देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। कॉयर बाजार के विस्तार का कार्य इस कारण से आसान बन गया है कि दुनिया भर के लोग पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली को अपना रहे हैं।उन्होंने कहा, ‘आज दुनिया भर में लोग हरित एवं पर्यावरण अनुकूल जीवन शैलियों को अपना रहे हैं। वैसे में कॉयर के व्यापाक उपयोग की सम्भावनाएं बढ़ गई हैं।

कॉयर केरल की नोडल एजेंसी तथा केरल में कॉयर के अनुसंधान एवं विकास के प्रयासों की अगुआई करने वाले राष्ट्रीय कॉयर अनुसंधान और प्रबंधन संस्थान (एनसीआरएमआई) के निदेशक डॉ  के आर  अनिल कहते हैं कि यूरोप के ठंडे वातावरण में, जो नारियल पेड़ के उष्णकटिबंधीय पर्यावास से हट गया है, कॉयर के अनेक तरह के इस्तेमाल हो रहे हैं।

नीदरलैंड में, नारियल की भूसी, जिसमें से रेशेदार कॉयर निकाल लिया जाता है, का इस्तेमाल राजमार्गों और अन्य व्यस्त सडक़ों के करीब स्थित घरों, कार्यालयों एवं खेल परिसरों में ध्वनि अवरोध समाधान के रूप में होता है। वह कहते हैं, ‘कॉयर में उत्कृष्ट ध्वनिक अवशोषण गुण है और डच क्षेत्रीय सरकारें उन जगहों के लिये कॉयर आधारित समाधानों की सिफारिश कर रही हैं जो पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील हैं, जहां कम शोर की जरूरत होती है।

पर्यावरण अनुकूल ध्वनिक बाधाओं के रूप में इन हल्के मॉड्यूलर दीवारों के जरिये 35 डेसिबल तक की ध्वनि का अवशोषण होता है। ध्वनि अवरोधकों के पैनल शत प्रतिशत पुनर्चक्रीय सामग्रियों एवं उनमें भरे टिकाऊ, प्राकृतिक नारियल फाइबर से निर्मित बल्लियों की दो पंक्तियों से बने होते हैं। साउंड इंसुलेटेड शीट को बल्लियों की दो पंक्तियों के बीच स्थापित किया जाता है। एक स्टील फिक्सर के भीतर पूरे फ्रेम को रखा जाता है।

परम्परागत सीमेंट की संरचना की तुलना में इस हल्के मॉड्यूलर निर्माण के कई लाभ हैं। एक लाभ तो यह है कि इसे आसानी से ले जाया जा सकता है और स्थापित किया जा सकता है। इसके लिए विशेष संरचनाओं की जरूरत नहीं होती है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि ये प्राकृतिक दीवार के ऊपर कपड़े के रूप में डाले जा सकते हैं, जिससे केवल शोर कम होता है बल्कि दीवारों की खूबसूरती बढ़ जाती है। 

जर्मनी में कॉयर यार्न दीवार का इस्तेमाल सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ साउंड प्रूफिंग के लिये हो रहा है। मजबूत कॉयर से बनी दीवारों पर हरी लताएं सहारा लेते हुये बढ़ती हैं और इस तरह से ये लताओं एवं फैलने वाले पौधों को सहारा प्रदान करते हैं। कॉयर अधिक लम्बे समय तक नमी बरकरार रखते हैं और इसका मतलब यह है कि यार्न दीवारों का सहारा लेकर बढऩे वाले पौंधों को कम पानी देने की जरूरत पड़ेगी। 

डॉ़ अनिल कहते हैं, ‘ये जोड़ केवल देखने में सुंदर लगते हैं बल्कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली सामग्रियों के इस्तेमाल को भी कम कर कर देते हैं। वह कहते हैं, ‘अगर यूरोप के लोग आयात होने वाली सामग्री का इस्तेमाल करके अद्भुत डिजाइनों का विकास कर सकते हैं तो मुझे पक्का विश्वास है कि हम उनकी तुलना में कहीं अधिक ऐसा कर सकते हैं, खास तौर पर केरल में जहां प्रचुर मात्रा में कॉयर उपलब्ध है।

मंत्री अडूर प्रकाश ने कॉयर उद्योग को केरल की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार बताते हुए कहा कि यह राज्य के ग्रामीण इलाकों में सबसे अधिक रोजगार प्रदान करता है। कॉयर उद्योग में करीब चार लाख लोग रोजगार में लगे हैं जिनमें से 80 प्रतिशत महिलाएं हैं। उन्होंने कहा, ‘कॉयर उद्योग की रोजगार सृजन की पूरी क्षमता का दोहन करने तथा कॉयर उद्योग को और अधिक आकर्षक बनाये जाने की अभी पूरी संभावना है। यह उद्योग हर साल 800 करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा अर्जित करता है। कॉयर के अभिनव उपयोगों को व्यापक स्वीकृति मिलने के बाद इस उद्योग में और तेजी आएगी।



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